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श्याम कोरी 'उदय'


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के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

जहां तक मेरा मानना है अर्थात मुझे प्रतीत होता है कि वर्त्तमान दौर में हमारे देश में साम्प्रदायिक हिंसा के हालात लगभग नहीं के बराबर हैं, और यदि कहीं हैं भी तो बहुत ही कम हैं, ठीक इसके विपरीत राजनैतिक हिंसा के हालात तो कदम कदम पर दिखाई देते हैं और इसकी मूल वजह आपसी सत्ता रूपी राजनैतिक प्रतियोगिता है। ऐसा कोई दिन नहीं है, ऐसा कोई गाँव या शहर नहीं है जहां आयेदिन राजनैतिक टकराव के हालात नजर नहीं आते ? राजनैतिक रस्साकशी व सत्तारुपी महात्वाकांक्षाओं के कारण घर, परिवार, गलियों, मोहल्लों, गाँव, शहर, लगभग सभी जगह देखते ही तनावपूर्ण हालात नजर आ जाते हैं।हालाँकि इसके लागु होने में संदेह है यानि कि पारित होने में भी ! लेकिन आपके विचार इसे और भी बेहतर समझने कि कोशिश करते हैं श्री श्याम जी !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

प्रिय श्याम जी , मै आप से पूरी तरह सहमत हूँ कि, ' लगभग सभी पैमानों पर, मापदंडों पर, दोनों सगे व जुड़वा भाई से नजर आते हैं, भाजपा में कहीं कोई ऐसे अलग भाव नहीं हैं जो जनता को कांग्रेस से अलग नजर आयें !' और मै भी चाहता हुँ कि , ' देश की सत्ता ऐसे लोगों के हांथों में रहे जो दागदार न हों, सजायाफ्ता न हों, छल व प्रपंच के उस्ताद न हों, झूठे दावों और झूठे वादों के खिलाड़ी न हों, अगर वो हों तो निष्पक्ष हों, पारदर्शी हों, साफ़-सुथरी छबी के हों, साफ़-सुथरे ख्यालों के हों, जिन पर देश का जनमानस गर्व कर सके !' इन दलों से तो कोई आशा नहीं है , परन्तु आप जैसे लेखकों के इस प्रकार के लेखों से अवश्य आशा है  जनता में उस सद्बुद्धी का उदय होगा , जो या तो इन दलो को सुधार देगी या किनारे लगा देगी । सुन्दर लेख । बधाई । .

के द्वारा: anilkumar anilkumar

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

श्याम कोरी जी आपका लेख बिचार पूर्ण है अमन की आशा दोनों ही देश क्यों सारी दुनिया चाहती है लकिन यह अमन की चिड़िया आकाश में उडती ही रहती है कभी धरती पर बैठती ही नहीं| प्रस्तुत संद्रव में मरी जानकारी में जो आता है वह यह है की देश का बत्बरा पाकिस्तान की जनता के तरफ से ऐसे कोई मांग नहीं उठी थी की पाकिस्तान अलग देश बने यह तो हमारे अंग्रेजी सासन का खेल था जो भारत को टुकरे में बात कर अमन चैन का हरण कराया जा सके.अंग्रेजी सासन सफल हुआ पाक का बुनोयाद दो राष्ट्र के सिद्धांत पर बना था | जो सिद्धांत बाद में बांग्लादेश के निर्माण के साथ ध्वस्त हो गया | अब आते है की पाक के निर्माण में किन करक तत्वों का अहम् रोल तो payenge की बड़े जोतदार जमींदार वैसे मुश्लिम बधिरों का सम्मिलित प्रयास था की आजाद हिंदुस्तान में उनके भविष्य का कोई स्थान नही रहता वे लोग दिल में नफरत की आग लिए इस मुल्क को छोड़ पाकिस्तान की धरती को काबुल किया आज़ादी के बाद पाकिस्तान में हिंदुस्तान की गंगा जन्मी संस्कृति पर हमला बोला और अपने को अरबी नश्ल के साथ जोड़ा और जितने भी भारतीय प्रतिमान थे सब को द्व्स्त करने का प्रयास किया यहाँ तक की भारतीय मौशिकी का भी अरबी करण करने से नही चूका वह के नेता अफ्श्रण निति निर्धारक विशे ही तत्व थे जो भारत से भाग कर पाकिस्तान में सरन लिए हुए थे और नफरत की आग भड़काने में कभी कोई गुरेज नहीं किया| जब उस   मुल्क के रहनुमा ऐसे ख़यालात के थे की भारत के साथ अमन के साथ न रहकर आधी रोटी खाकर हजार साल तक लड़ने की बात कर रहा हो तो अमन की आश का बिश्वास कुछ समय के लिए गद्द्ब्रा जाता है | आप देखेंगे की आज़ादी मिलने के तुरत बाद कबैलियो का आक्रमण कश्मीर घटी में होना और कश्मीर घटी के कुछ भाग पर अधिकार जमा लेना और कश्मीर राग का अलापना क्या दर्शाता है? १९६५ का यूध हो या १९७१ की लड़ाई अमन का क़त्ल उन लोग के द्वारा होता आ रहा है| इस नफरत की फसल में उस मुल्क में कभी अमन चैन नहीं रहा | कभी तालिबान कभी ल-इ-टी- तो कभी हरकत उल मुजाहिद्दीन सिपाहे साहेबा सिपाहे झंग्बी ये सारे अमन के दुश्मन है प्रतिऊत भारत के ! वहा के सैनिक इस बात को अच्छी तरह जानती है की भारत पाकिस्तान अमन चैन अगर कायम हो जाये तो उनकी अहमियत ख़त्म हो जियेगी इसलिए जब कोई अमन नाम की चिड़िया दोनों देश के हुक्मरान पकरना चाहते है तो कोई ऐसे बर्दत को अंजाम दे देते है की सन्ति प्रक्रिया भंग हो जाये या ब्याव्धायण हो जाये इन वारदातों की लम्बी फेहरिस्त है जिश्मे कुछ बानगी ये है छातीश सिंह पूरा नर शंघार २६/११ का अटैक कारगिल मिशन|

के द्वारा:

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के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

के द्वारा: Neha Kushwaha Neha Kushwaha

के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

भाई श्याम जी अरविन्द केजरीवाल जी की समस्या यह नहीं है वह तो केवल यह चाहते है की अगर उनके द्वारा प्रस्तावित जन लोकपाल बिल ही अगर संसद के द्वारा पारित कर दिया जाय तो वर्तमान आधे मंत्री जेल में होंगे जैसा उन्होंने अपनी प्रैस काफ्रेंस में कहा था इस लिए यह कहा जाय की लोकपाल बिल को ड्राफ्ट करने वाले पूर्ण इमानदारी से काम कर रहे है तो यह बेमानी ही होगा क्योंकी जहां सरकारी मंत्रियों की मंशा नए नए अड़ंगे लगाने की है वहीं सिविल सोसाइटी भी कुछ कम आग्रह नहीं रखती - राग और द्वेष से रहित कोई नहीं है यह सब खेल केवल जनता को ठगने का नाटक मात्र है नहीं तो यह कानून आज से ४२ वर्ष पहले ही तैयार हो जाना था जैसा की वर्तमान सह-अध्यक्ष श्री शांति भूषण का प्रयास था जब वह कानून मंत्री थे अगर वह तब नहीं बन पाया तो उसका कारण भी वही जानते होंगे ?

के द्वारा:

के द्वारा: श्याम कोरी 'उदय' श्याम कोरी 'उदय'

के द्वारा:

के द्वारा: munendrapratapsingh munendrapratapsingh

This refers to a news item published at page 17 of Dainik Jagran (Rashtriya Jagran): Allahabad, 21st November 2010, titled: "अब स्वामी ने साधा सोनिया पर निशाना " The news starts as below: "देहरादून , जागरण ब्यूरो : जनता पार्टी के अध्यक्ष अब 2 जी स्पेक्ट्रुम घोटाले कि ज़द में कांग्रेस व यू पी ए अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भी ले आये हैं ! उन्होंने आरोप लगाया कि पौने दो लाख करोड़ रुपये के 2 जी स्पेक्ट्रुम घोटाले में 60 हज़ार करोड़ रुपये घूस में बांटी गयी , जिसमें चार लोग हिस्सेदार थे . इस घूस में सोनिया गाँधी की दो बहिनों का हिस्सा 30-30 प्रतिशत है . दस जनपथ को घोटाले का केंद्र बिंदु बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री सब कुछ जानते हुए भी मूक दर्शक बने रहे . etc. - etc." I know not how such a 'terrible' news has not reached the Government or the CBI or the Courts for possible sue-motto actions?

के द्वारा:

के द्वारा: jalal jalal

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

के द्वारा: loksangharsha loksangharsha

"नक्सलवाद ने क्या-क्या रचनात्मक कार्य किये हैं और क्या-क्या कर रहे हैं ….. शायद वे जवाब में निरुत्तर हो जायें … क्योंकि यदि कोई रचनात्मक कार्य हो रहे होते तो वे कार्य दिखाई देते…. दिखाई देते तो ये प्रश्न ही नहीं उठता …. पर नक्सलवाद के कारनामें … कत्लेआम … लूटपाट … मारकाट … बारूदी सुरंगें … विस्फ़ोट … आगजनी … जगजाहिर हैं … अगर फ़िर भी कोई कहता है कि नक्सलवाद विचारधारा है तो बेहद निंदनीय है।" श्याम जी वंदेमातरम ! नक्सलियों का समर्थन भारत विरोधी कम्युनिस्टों ने किया है । उनका पूरा का पूरा इतिहास ही भारत विरोध का रहा है । इस पोस्ट से बहुतों के दिमाग में लगे जाले साफ हुये होंगे । आभार ।

के द्वारा:

श्याम जी आपकी पोस्ट तो सही दिसा में है -- जन मानस भी यही चाहता है की देश में अमन चैन रहे और हर गरीब का पेट भरता रहे -- परन्तु आज के समझ दार राजनितिक लोग भी ऐसा ही चाहते क्या -- शायद इसका जवाब ढूंडा जाय तो नहीं में होगा - जहाँ तक सिमी की बात है इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती की वह एक देशद्रोही संगठन है इसी लिए उस पर प्रतिबंध भी लगा है जो की उचित ही है / जहाँ तक आर०एस०एस० की बात उसकी देश भक्ति के विषय में किसी सर्टिफिकेट की जरुरत नहीं हो सकती परन्तु क्या कारण है की उसकी उग्र विचार धरा के ही कारण स्वतंत्रता के पश्चात उस पर तीन बार प्रतिबन्ध लग चूका है -- यह तो भारत का आम अनपढ़ गवार व्यक्ति भी जनता है की अगर कोई व्यक्ति दागी हो जाता है तो समाज उससे दुरी बना लेता है - यह बात आर एस एस की समझ में क्यों नहीं आती --- एक ओर आर एस एस यह कहता है की वह एक विशुद्ध सांस्कृतिक संघठन है वहीँ दूसरी ओर उसके कार्य करता बी जे पी जैसे विशुद्ध राजनैतिक पार्टी में ऊँचे पदों पर तैनात होते रहते है यहाँ तक की कुछ राज्यों की मुख्य-मंत्री भी हैं - जहाँ आर एस एस में मुस्लिम किसी भी पद पर नहीं है / अस्वीकार है वहीँ बि०जे०पी० में मुस्लिम रसगुल्ले खा रहे है और उपाध्यक्ष पद तक विराजमान हैं क्या इस बात का उत्तर है --- ऐसा विरोधाभाष क्यों दिखता है -- क्या दुमुही निति नहीं है - अत; आर एस एस को सांस्कृतिक लिबादा उतार कर विशुद्ध राजनितिक चोला ओड़कर मैदान में उतर जाना चाहिए - क्योंकि अगर विशुद्ध सांस्कृतिक संघठन है तो जब गैर बी जे पी संघठन की सरकार होती है तो आर एस एस एवं उसके विभिन्न संघठनो के सुर क्यों सरकार विरोधी हो जाते हैं - अगर ऐसा नहीं होता तो मिस्टर राजीव गाँधी जैसे लोग हमेसा ऐसी ही टिपण्णी करते रहेगे - जब तक आर एस एस और बी जे पी प्रज्ञा ठाकुर कर्नल पुरोहित और स्वयंभू शंकराचार्य (जो कानपूर से पकड़ा गया था) का समर्थन करेंगे तो आप ही बताये की आप क्या कहेंगे

के द्वारा:

के द्वारा: राजीव तनेजा राजीव तनेजा

भ्रष्टाचाररूपी दानव मिट नहीं सकता. क्योंकि हम सब भी किसी न किसी रूप में भृष्ट हैं. भृष्ट नेताओं को जानते हुए भी वोट देतें हैं, अपने स्वार्थ,जाति,सम्प्रदाय के आधार पर वोट देते हैं.वंश के वारिसो को युवा नेता मान लेते हैं. काम को करवाने के लिए रिश्वत देते हैं जान पहचान का सहारा लेते हैं, किराये के पैसे बचाने के लिए बस परिचालक को कम पैसे देकर सरकार को नुक्सान पहुंचाते हैं. पैसे लेकर समाचार छापते हैं,जो पार्टी अछे होटल में लंच डिनर देती है उसकी न्यूज़ बड़ी और सकारात्मक छापते है.अपनी विचारधारा के अनुसार सम्बंधित पार्टी के गलत कामो को भी न्यायोचित ठहराते है.कार्यालय में देर से जाते है और जल्दी भाग आते हैं.टूर पर दो घंटे के लिए जाते हैं पुरे दिन का डी ए चार्ज करते हैं.जो अधिक कमीशन दे उसकी दवाइयां लिखते है, जो कर नहीं ले उस दुकान से सामान खरीदते हैं, वेट चुकाने से बचने का प्रयास करते हैं, client बना रहे इस लिए मुकदमे को लंबा खिंचाते हैं,अपनी कलम के जोर पर अपने लिए विशेष कोटे में प्लाट लेते हैं,कामचोरी करते हैं capitation फीस देकर अयोग्य संतान को डॉक्टर इन्गिनियर बनाते हैं,कोचिंग की कक्षा में जातें हैं पर नियमित स्कूल से फर्जी हाजिरी लेते हैं, .......यह सूचि बहूत लम्बी हो जाएगी कुल मिला कर इस देश को अब तो कोई अवतार ही भ्रष्टाचाररूपी दानव से मुक्ति दिला सकता हैं जी हाँ हमारी मान्यता के अनुसार भगवान् ही दानवो का नाश करने के लिए अवतरित होते हैं.

के द्वारा:

क्या बात है कोरी जी, एक सुखद बयार लेकर आये आप इस मंच पर पूरी व्यवस्था का चरित्र चित्रण इतने सही अंदाज़ में आपने किया है कि मन खुश हो गया | भ्रश व्यवस्था सिर्फ दोषारोपण करके खुद को बेदाग़ साबित करती है और इनका ये फार्मूला इतना कारगर है कि कुछ लोगों ने तो बाकायदा इस भ्रष्टाचार के मानदंड बना लिए हैं और बाकायदा इसका समर्थन करते हैं| आज लोगों की नज़र में वो बेईमान या भ्रष्ट नहीं जो रिश्वत ले कर काम करता है, बल्कि समाज उसे बेईमान मानता है जो रिश्वत लेकर भी काम नहीं करता| क्या नई-नई परिभाषाये गढ़ रहे हैं हम अभी किस गर्त में जायेंगे कोई पता नहीं| हिन्दुस्तान भेडिया धसान! अच्छी पोस्ट पर बधाई|

के द्वारा: chaatak chaatak

बहुत खूब .......... जन्मदिन पर भगवान् श्री कृष्ण को ऐसा तोहफा......... ये मर्यादा सम्मत नहीं है......... कृष्ण और एक लोफर के संग तुलना............ वास्तव में कलयुग का अंत निकट है......... आप जहा तक लिखते हैं की. कृष्ण कैसे छिप-छिप कर गोपियों को नहाते देखते थे, कैसे निहारते रहते थे, ....... तो शायद आप कृष्ण के बारे में कुछ नहीं जानते ....... श्री कृष्ण के सम्बन्ध में ये कहा गया है की सोलह हज़ार गोपिओं से उनका प्रेम था .............. तो इसमें गलत क्या है......... एक पिता का अपनी सभी पुत्रिओं से प्रेम होता है............ अगर कृष्ण के प्रति श्रधा व प्रेम केवल गोपिओं के भीतर ही था तो ये श्री कृष्ण का दोष नहीं है............. और जहाँ तक कृष्ण के गोपियों के वस्त्र छिपाने की बात है तो वो इसी सन्दर्भ में था की जो गोपिओं के मन में कृष्ण के प्रति श्रधा व प्रेम था उसपर गोकुल के लोगों की टिपण्णी को लेकर गोपियाँ कृष्ण के प्रति अपने भाव प्रकट करने में झिझकती थी...... और उनके कपडे छुपा कर कृष्ण ने उनको सन्देश दिया था... की ये लाज और शर्म छोड़ कर ........ ये भावना छोड़ कर की कौन आपके सम्बन्ध में क्या सोचता है........ अगर आगे आ सके तो ही मुझे अर्थात परमात्मा को पाया जा सकता है................. के मीरा ने कभी श्री कृष्ण को देखा .......... फिर क्यों ...... अगर श्री कृष्ण मीरा के युग में जीवित होते तो निसंदेह मीरा के प्रति भी लोगों का रुख यही होता............... धर्म के नाम पर अधर्म नहीं होना चाहिए.......... धर्म आत्मीय विषय है ........ हास्य का नहीं........... शुक्रिया............

के द्वारा: Piyush Pant Piyush Pant

के द्वारा:




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